परियोजना मार्ग बदले - राम सेतु बचाए
भगवन राम द्वारा समुद्र पार करने के लिए निर्मित रामसेतु से जुडी करोडो हिन्दुओ की भावनाओ को निर्लज्जता पूर्वक कुचलते हुवे भारत सरकार के अधिकारी विवादास्पद 'सेतु समुद्रम नहर परियोजना ' के क्रियान्वन की हठ पर अडे हुवे हैं । अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा उनकी इस दुराग्रही व उतावली प्रवुत्ति की तीव्र भर्त्सना करती है। केन्द्रीय जहाजरानी मंत्री द्वारा सेतु समुद्रम नहर परियोजना का विरोध करनेवालों को 'राष्ट्रविरोधी' करार देने वाले वक्तव्य का भी प्रतिनिधि सभा विरोध करती है।
प्रतिनिधि सभा मंत्री महोदय सहित अन्य अधिकारियो को यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि मिश्र के लगभग ४,५०० वर्ष पुराने पिरामिदो तथा लगभग २,६०० वर्ष पुरानी चीन की विशाल दिवार से भी अधिक प्राचीन, भारत की युगों पुरानी थाती तथा विश्व की प्राचीनतम मानव निर्मित संरचना को विनष्ट करने के घृणित मंसुबो की गंध इस समूची परियोजना से आती है। इसकी पुष्टि इस तथ्य से भी हो जाती है कि उक्त नहर परियोजना के निर्माण हेतु अधिकारियों के समक्ष किसी भी धरोहर को नष्ट न करते हुवे कई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध थे। उन्होने न केवल पर्यावरण विदों द्वारा उठाई गई आपत्तियों तथा उस क्षेत्र के हजारो मछुहारो के गंभीर आजीविका संकट को नजर अंदाज़ किया है वरन समुंद्री पुरातत्व विज्ञान विशेषज्ञों से परामर्श करना भी ठुकरा दिया है। पर्यावरण विदों तथा भू विग्यानिको का कहना है कि इस अवरोध के विनष्ट होने से अपने समुद्र तट पर भविष्य मे सुनामी जैसी आपदाओ का संकट खड़ा हो जाएगा। प्रतिनिधि सभा यह स्मरण करना चाहती है कि औद्योगीकरण तथा मेट्रो रेल जैसी विकास परियोजनाओ के कारण उत्पन्न होने वाले खतरों से आगरा के ताजमहल तथा दिल्ली के कुतुबमीनार जैसे स्थानों को जनता तथा न्यायपालिका के हस्तक्षेप से बचाया गया है। उपर्युक्त दोनो स्थल जहाँ केवल कुछ शताब्दियों पुराने है वहीं रामसेतु की ऐतिहासिकता सह्स्त्रब्दियो पुरानी है ।
प्रतिनिधि सभा सरकार से मांग करती है कि वह भारतीय सविंधान के अनच्छेद '५१ क' के अंतर्गत इस सेतु को सरंक्षित स्मारक घोषित करे तथा भावी अध्ययनों हेतु उसे पुरातत्व विभाग को सौप दे । प्रतिनिधि सभा देशवासियों का आव्हान करती है कि केन्द्र सरकार को इस क्रूर कृत्य का परित्याग करने हेतु विवश करने के लिए तत्काल राष्ट्रव्यापी अभियान प्रारंभ करे ।
इस सभा का सरकार को यह परामर्श है कि वह रामनाथपुरम जिला न्यायालय द्वारा निर्देशित सुझाओ के अंतर्गत एक विशेषज्ञ समिति का अविलम्ब गठन कर उसे परियोजना का वैकल्पिक मार्ग तैयार करने का निर्देश दे , जिससे देश के वाणिज्यिक लक्ष्यों की पूर्ति होने के साथ साथ पवित्र रामसेतु को नष्ट होने से बचाया जा सके।
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