
सेतु समुद्रम
रामसेतु केवल धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रश्न नही है अपितु राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण, सामुद्रिक जेविय जीवन तथा तटीय लोगो के जीविका से जुदा सवाल है।
यह सेतु प्राकुतिक आपदाओ से हमारी सुरक्षा करने मे भी सक्षम है । इसमे स्थित थोरियम का अपार भंडार हमारे देश की सदियों की उर्जा की आवश्यकता पूर्ति कर सकता है। यह सेतु समुद्र की उग्रता को शांत करने मे सक्षम है तथा सुनामी से हमारी सुरक्षा की क्षमता रखता है।
लेकिन सरकार अमेरिका के दबाव मे आकर राम सेतु को तोड़ने पर उतारू है । भारत व श्रीलंका के मध्य का सागर अभी तक अंतर्राष्ट्रीय सागर कानून के मुताबिक ऐतिहासिक क्षेत्र कहलाता है। इस क्षेत्र के जल पर भारत व श्रीलंका का अधिकार है । अमेरिका इस जल क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र घोषित करवाना चाहता है क्योंकि वह पहले से ही इस क्षेत्र को ऐतिहासिक क्षेत्र की मान्यता नही देता। यदि सेतु समुद्रम परियोजना श्रीराम सेतु को तोड़कर पूरी की जाती है तो इस मार्ग से सभी देशो के जलयान गुजरेंगे और यह क्षेत्र स्वत: ही अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र हो जाएगा।
केरल के तटों पर थोरियम का विशाल भंडार है । यहाँ दुनिया को ९० प्रतिशत थोरियम है। अब तक इस भंडार पर भारत का अधिकार है । श्रीराम सेतु टूटने पर यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र घोषित हो जाएगा फिर इस भंडार पर अमेरिका द्वारा अपनी दादागिरी के बल पर कब्जा किया जा सकेगा।
सेतु समुद्रम परियोजना मी बनने वाली नहर की गहराई कम होने के कारण यहाँ से भारी जलयान नही गुजर सकेंगे । अमेरिका यही चाहता है कि उसकी पनडुब्बियों यहाँ से होकर गुजर सके। नहर से अमेरिकी पनडुब्बियों का गुजरना या रहना भारत व श्रीलंका दोनो देशों की आंतरिक सुरक्षा के लिए घातक है।
विध्वंशक है सेतु समुद्रम परियोजना
सुनामी विशेषज्ञों तथा अंतर्राष्ट्रीय भू - वैज्ञानिको व पर्यावरण विदों के अनुसार यह योजना असंगत ही नही विध्वंसक है। राष्ट्रीय पर्यावरण शोध संस्थान (नेरी ) ने स्पष्ट किया है कि रामसेतु को तोड़ने से भारत व श्रीलंका के मध्य सागर के उत्तरी भाग पाक जल डमरू मध्य के पर्यावरण पर बहुत गहरा असर पड़ेगा जो हमारे देश के लिए घातक होगा। इस क्षेत्र मे सन १८६० से २००० के बीच आये चक्रवातों के अध्ययन के आंकडो से पता चलता है कि इस क्षेत्र मे चार वर्षो मे एक बार चक्रवात आता है। ये चक्रवात अपने साथ भारी मात्रा मे मिटटी व पत्थरो को खाडी से ले आते हैं। रामसेतु इन चक्रवातों से केरल के तटों की रक्षा करता रहा है। 'नेरी' ने भीषण आपदाएं आने की संभावना व्यक्त करते हुए रामसेतु को क्षति नही पहुचाने की राय दी है।
'नेरी' द्वारा किये गए अध्ययनों से यह बात पता चलती है कि दिसम्बर २००४ मे आये सुनामी तूफान ने तमिलनाडु तथा केरल मे असर दिखाया था । पर्यावरण और वन मंत्रालय के लिए २००५ मे भू - गर्भ विभाग द्वारा किये गए सर्वेक्षण मी कहा गया कि सुनामी लहरों से तमिलनाडु और अंडमान निकोबार के तटीय क्षेत्रो मे तबाही हुई थी तथा बंगाल की खाडी मे जलीय जीवों को नुकसान पंहुचा था , यदि श्रीराम सेतु नही होता तो यह तबाही बहुत ज्यादा मात्र मे होती । श्रीराम सेतु ने सुनामी की तीव्रता को बहुत कम कर दिया था।
तिरुवनंतपुरम स्थित भू - गर्भ केन्द्र के डॉ सी पी राजेंद्रन ने रामसेतु को तोड़ने से पर्यावरण को होने वाली क्षति की चेतान्वानी देते हुवे कहा है कि सेतु समुद्रम योजना से प्रकुतिक भू - क्षरण प्रक्रिया मे बाधा उत्पन्न हो जायेगी । इस योजना के माध्यम से हम एक और प्रकुतिक आपदा को बुलावा दे रहे हैं ।
विश्व के जाने मने सुनामी विशेषज्ञ कनाडा के डॉ ताड एस मूर्ति ने सेतु समुद्रम योजना के विध्वंशकारी परिणामो पर विस्तृत और गंभीर विचार व्यक्त किये हैं।
डॉ ताड ने कहा कि हिंद महासागर मे २००४ मे आई सुनामी के समय केरल का दक्षिणी भाग इसके प्रकोप से रामसेतु के कारण ही बचा था। यदि श्रीराम सेतु को तोड़कर नहर निकली गई तो सुनामी को सीधा मार्ग मिल जाएगा तथा वह और अधिक तीव्रता से दक्षिण समुंद्री तट पर तबाही मचा सकती है।
रामसेतु रक्षा के लिए आंदोलन
करोडो हिन्दुओ की आस्था के प्रतीक , विश्व की प्राचीनतम धरोहर , ऐतिहासिक रामसेतु को तोड़ने के षड्यंत्र को सफल नही होने देने तथा इसकी रक्षा व सरक्षण कर राष्ट्रीय धरोहर घोषित करवाने के लिए विश्व हिन्दू परिषद ने सरकार को राष्ट्र व्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है । गत ९ मार्च से ११ मार्च २००७ तक सम्पन्न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक मे "परियोजना मार्ग बदले - श्री रामसेतु बचाए" प्रस्ताव पारित कर, सरकार द्वारा 'सेतु समुद्रम नहर योजना' के क्रियान्वन की निंदा करते हुवे सरकार से श्रीराम सेतु को भारतीय संविधान के अनुच्छेद '५१ क ' के अंतर्गत संरक्षित स्मारक घोषित करने तथा आगामी अध्ययनों के लिए पुरातत्व विभाग को सोपने की मांग की।
तत्कालीन राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने भी एक कार्यक्रम मे श्रीराम सेतु की उपयोगिता को स्वीकार किया था।
अनेक पर्यावरण विदों , भू वैज्ञानिको, समुद्री सर्वेक्षको तथा सुनामी विशेषज्ञों ने भी श्रीराम सेतु को तोड़ना देश के लिए घातक आपदाओ का बुलावा बताया है। सरकार के इस अडियल रवैये के विरोध मे भाजपा तथा सभी संतो ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाने की घोषणा की है। विहिप ने भी संतो का पुरा साथ देने का निर्णय लिया है। देश के मुस्लिम तथा ईसाई समुदाय ने भी श्रीराम सेतु को तोड़ने का विरोध किया है क्योकि यह सेतु केवल हिन्दू आस्था का केन्द्र ही नही , हमारे देश को भीषण आपदाओ से बचाने वाला रक्षक भी है।
-- "पाथेय कण" पत्रिका से साभार
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